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mahabharat 8.22.13: वंगराज अपना शरीर सिकोड़कर हाथी से कूदने ही वाले थे कि सात्यकि ने भाले से उनकी छाती में चोट पहुंचाई; जिससे वे घायल होकर जमीन पर गिर पड़े।   |   mahabharat अध्याय 8.22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  8.22.13 
तस्यावर्जितकायस्य द्विरदादुत्पतिष्यत:।
नाराचेनाहनद् वक्ष: सात्यकि: सोऽपतद् भुवि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वंगराज अपना शरीर सिकोड़कर हाथी से कूदने ही वाले थे कि सात्यकि ने भाले से उनकी छाती में चोट पहुंचाई; जिससे वे घायल होकर जमीन पर गिर पड़े।
 
Vangaraja was about to shrink his body and jump off the elephant when Satyaki pierced his chest with a spear; thus, he fell down on the ground, wounded.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)