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mahabharat 8.22.12: उसी समय सात्यकि ने अपने सामने खड़े राजा वंग के हाथी के प्राणों को एक अत्यन्त शक्तिशाली बाण से छेदकर उसे नीचे गिरा दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.22.12 
प्रमुखे वर्तमानं तु द्विपं वङ्गस्य सात्यकि:।
नाराचेनोग्रवेगेन भित्त्वा मर्माण्यपातयत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उसी समय सात्यकि ने अपने सामने खड़े राजा वंग के हाथी के प्राणों को एक अत्यन्त शक्तिशाली बाण से छेदकर उसे नीचे गिरा दिया।
 
At that very moment Satyaki pierced the vital spots of the elephant of King Vanga, who was standing before him, with a very strong arrow and knocked it down.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)