Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.22.11: वे अपने दांतों के अगले भाग से कितनों को छेद देते और कितनों को अपनी सूँड से घसीटकर दूर फेंक देते। अनेक योद्धा उनके दांतों में उलझकर अत्यंत भयानक अवस्था में गिर पड़ते। | mahabharat अध्याय 8.22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बिभिदुश्च विषाणाग्रै: समाक्षिप्य च चिक्षिपु:।
विषाणलग्नाश्चाप्यन्ये परिपेतुर्विभीषणा:॥ ११॥
अनुवाद
वे अपने दांतों के अगले भाग से कितनों को छेद देते और कितनों को अपनी सूँड से घसीटकर दूर फेंक देते। अनेक योद्धा उनके दांतों में उलझकर अत्यंत भयानक अवस्था में गिर पड़ते।
They would pierce many with the front part of their teeth and drag many with their trunks and throw them away. Many warriors would fall down in a very terrifying state after being entangled in their teeth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥