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mahabharat 8.22.10: वे अत्यन्त क्रोध से भरे हुए हाथी म्लेच्छों द्वारा आगे बढ़ाए हुए मनुष्यों, घोड़ों और रथों को अपनी सूँडों से उठाकर दूर फेंक देते और पैरों से कुचल देते थे॥10॥   |   mahabharat अध्याय 8.22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 22: पाण्डव-सेनापर भयानक गजसेनाका आक्रमण, पाण्डवोंद्वारा पुण्ड्रकी पराजय तथा बंगराज और अंगराजका वध, गजसेनाका विनाश और पलायन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  8.22.10 
ते म्लेच्छै: प्रेषिता नागा नरानश्वान् रथानपि।
हस्तैराक्षिप्य ममृदु: पद्भिश्चाप्यतिमन्यव:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वे अत्यन्त क्रोध से भरे हुए हाथी म्लेच्छों द्वारा आगे बढ़ाए हुए मनुष्यों, घोड़ों और रथों को अपनी सूँडों से उठाकर दूर फेंक देते और पैरों से कुचल देते थे॥10॥
 
Driven forward by the mlecchas, those extremely furious elephants would lift up men, horses and chariots with their trunks and throw them away and trample them with their feet.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)