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mahabharat 8.21.35: ध्वजा, मस्तक, छत्र, हाथी की सूँड़ और मनुष्यों की भुजाएँ - ये सब कुल्हाड़ियों, भालों और अर्धचन्द्रों से कटकर भूतल पर पड़े हुए थे ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 8.21: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 21: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  8.21.35 
ध्वजा: शिरांसि च्छत्राणि द्विपहस्ता नृणां भुजा:।
क्षुरैर्भल्लार्धचन्द्रैश्च च्छिन्ना: पेतुर्महीतले॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
ध्वजा, मस्तक, छत्र, हाथी की सूँड़ और मनुष्यों की भुजाएँ - ये सब कुल्हाड़ियों, भालों और अर्धचन्द्रों से कटकर भूतल पर पड़े हुए थे ॥35॥
 
The flag, the head, the umbrella, the elephant's trunk and the arms of humans - all of them were cut by axes, spears and crescent moons and were lying on the ground floor. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)