Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.21.30: अनेक वीर पुरुषों के शरीर शस्त्रों से घायल और निर्जीव पड़े थे; किन्तु उनके खुले हुए मुखों में रक्तरंजित दांतों के कारण वे फूटे हुए अनार के फल के समान प्रतीत होते थे और उनके मुखों के कारण वे जीवित प्रतीत होते थे।   |   mahabharat अध्याय 8.21: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 21: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  8.21.30 
दन्तपूर्णै: सरुधिरैर्वक्त्रैर्दाडिमसंनिभै:।
जीवन्त इव चाप्येके तस्थु: शस्त्रोपबृंहिता:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
अनेक वीर पुरुषों के शरीर शस्त्रों से घायल और निर्जीव पड़े थे; किन्तु उनके खुले हुए मुखों में रक्तरंजित दांतों के कारण वे फूटे हुए अनार के फल के समान प्रतीत होते थे और उनके मुखों के कारण वे जीवित प्रतीत होते थे।
 
Many a brave man's body lay wounded by weapons and lifeless; but because of the bloodied teeth in their open mouths, they appeared like burst pomegranate fruits and because of their mouths they appeared to be alive.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)