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mahabharat 8.21.27-28: हे महाराज! वे महाबली योद्धा कमर बाँधे, कवच, मुकुट और आभूषण धारण किये हुए गर्जना करते, उछलते और एक दूसरे को चुनौती देते हुए एक दूसरे पर गदा, मूसल और मृत्यु के समान गदाओं से आक्रमण कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.21: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 21: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  8.21.27-28 
सुसंनद्धा: कवचिन: सशिरस्त्राणभूषणा:।
गदाभिर्मुसलैश्चान्ये परिघैश्च महाबला:॥ २७॥
समभ्यधावन्त भृशं कालदण्डैरिवोद्यतै:।
नर्दन्तश्चाह्वयन्तश्च प्रवल्गन्तश्च मारिष॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज! वे महाबली योद्धा कमर बाँधे, कवच, मुकुट और आभूषण धारण किये हुए गर्जना करते, उछलते और एक दूसरे को चुनौती देते हुए एक दूसरे पर गदा, मूसल और मृत्यु के समान गदाओं से आक्रमण कर रहे थे।
 
Honorable King! The mighty warriors, girded with their loins, wearing armour, helmets and ornaments, roared, leaped and challenged each other, attacking each other with maces, pestles and clubs, which were like the rods of death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)