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mahabharat 8.21.23: जैसे घुड़सवार अपने घोड़ों को चाबुक से पीटता है, उसी प्रकार कर्ण ने भी अपने धनुष को छुड़ाकर शत्रुओं के भुजबलों पर ऐसे बाणों से प्रहार करना आरम्भ किया, जिनसे उनके कवच, शरीर और आत्मा मथ डाले गए।   |   mahabharat अध्याय 8.21: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 21: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  8.21.23 
वर्मदेहासुमथनैर्धनुष: प्रच्युतै: शरै:।
मौर्व्या तलत्रे न्यहनत् कशया वाजिनो यथा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जैसे घुड़सवार अपने घोड़ों को चाबुक से पीटता है, उसी प्रकार कर्ण ने भी अपने धनुष को छुड़ाकर शत्रुओं के भुजबलों पर ऐसे बाणों से प्रहार करना आरम्भ किया, जिनसे उनके कवच, शरीर और आत्मा मथ डाले गए।
 
Just as a horse-rider beats his horses with a whip, so Karna, having freed himself from his bow, began to attack the hand-guards of his enemies with arrows that churned their armour, bodies and souls. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)