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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 21: कौरव-पाण्डव-दलोंका भयंकर घमासान युद्ध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  8.21.22 
चर्मवर्माणि संछिन्नान्यपतन् भुवि देहिनाम्।
विषेहुर्नास्य संस्पर्शं द्वितीयस्य पतत्रिण:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उस समय देहधारियों के कवच और त्वचा टुकड़े-टुकड़े होकर धरती पर गिर रहे थे। शत्रु सैनिक कर्ण के दूसरे बाण का स्पर्श भी सहन नहीं कर पा रहे थे।
 
At that time the skin and armour of the embodied beings were falling to the ground in pieces. The enemy soldiers were unable to bear the touch of Karna's second arrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)