श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 20: अश्वत्थामाके द्वारा पाण्ड्यनेरशका वध  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  8.20.46 
द्विपस्य पादाग्रकरान् स पञ्चभि-
र्नृपस्य बाहू च शिरोऽथ च त्रिभि:।
जघान षड्‍‍भि: षडनुत्तमत्विष:
स पाण्ड्यराजानुचरान् महारथान्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
पाँच बाणों से उसने हाथी के पैर और सूँड़ काट डाले। फिर तीन बाणों से उसने पाण्ड्यराज की दोनों भुजाएँ और सिर धड़ से अलग कर दिया। इसके बाद छः बाणों से उसने पाण्ड्यराज का पीछा कर रहे उत्तम कान्ति से सुशोभित छः महारथियों को मार डाला।
 
With five arrows he cut off the elephant's legs and trunk. Then with three arrows he severed the Pandya king's both arms and head from the body. After this with six arrows he killed the six great warriors adorned with excellent luster who were following the Pandya king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)