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mahabharat 8.20.44: सूर्य, चन्द्रमा, ग्रहों और अग्नि के समान प्रकाशित वह मुकुट उस बाण के भारी प्रहार से टुकड़े-टुकड़े होकर पृथ्वी पर बड़े शब्द के साथ गिर पड़ा, जैसे इन्द्र के वज्र से चोट खाकर पर्वत का शिखर बड़े शब्द के साथ गिर पड़ता है ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 8.20: अश्वत्थामाके द्वारा पाण्ड्यनेरशका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 20: अश्वत्थामाके द्वारा पाण्ड्यनेरशका वध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  8.20.44 
तदर्कचन्द्रग्रहपावकत्विषं
भृशातिपातात् पतितं विचूर्णितम्।
महेन्द्रवज्राभिहतं महास्वनं
यथाद्रिशृङ्गं धरणीतले तथा॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
सूर्य, चन्द्रमा, ग्रहों और अग्नि के समान प्रकाशित वह मुकुट उस बाण के भारी प्रहार से टुकड़े-टुकड़े होकर पृथ्वी पर बड़े शब्द के साथ गिर पड़ा, जैसे इन्द्र के वज्र से चोट खाकर पर्वत का शिखर बड़े शब्द के साथ गिर पड़ता है ॥ 44॥
 
That crown, shining like the sun, the moon, the planets and the fire, was shattered into pieces by the heavy blow of that arrow and fell on the earth with a loud noise, just as the peak of a mountain crumbles with a loud noise when struck by Indra's thunderbolt. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)