श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 20: अश्वत्थामाके द्वारा पाण्ड्यनेरशका वध  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  8.20.43 
मणिप्रवेकोत्तमवज्रहाटकै-
रलंकृतं चांशुकमाल्यमौक्तिकै:।
हतो हतोऽसीत्यसकृन्मुदा नदन्
पराहनद् द्रौणिवराङ्गभूषणम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
उस भाले से उसने अश्वत्थामा के मुकुट पर, जो बहुमूल्य रत्नों, उत्तम हीरों, स्वर्ण, वस्त्रों, मालाओं और मोतियों से विभूषित था, प्रहार किया और बार-बार हर्षपूर्वक कहता रहा, "तू मारा गया, तू मारा गया।"॥43॥
 
With that spear he struck Ashvatthama's crown, which was adorned with precious stones, finest diamonds, gold, clothes, garlands and pearls, again and again saying joyfully, "You are killed, you are killed."॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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