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mahabharat 8.20.41: किन्तु पाण्ड्य राजा मलयध्वज, जो हाथी-युद्ध में निपुण था, उस महान हाथी पर, जो पर्वत शिखर के समान ऊँचा था, उसी प्रकार तेजी से चढ़ गया, जैसे कोई सिंह गर्जना करता हुआ पर्वत शिखर पर चढ़ता है।   |   mahabharat अध्याय 8.20: अश्वत्थामाके द्वारा पाण्ड्यनेरशका वध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 20: अश्वत्थामाके द्वारा पाण्ड्यनेरशका वध  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  8.20.41 
तं वारणं वारणयुद्धकोविदो
द्विपोत्तमं पर्वतसानुसंनिभम्।
समभ्यतिष्ठन्मलयध्वजस्त्वरन्
यथाद्रिशृङ्गं हरिरुन्नदंस्तथा॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
किन्तु पाण्ड्य राजा मलयध्वज, जो हाथी-युद्ध में निपुण था, उस महान हाथी पर, जो पर्वत शिखर के समान ऊँचा था, उसी प्रकार तेजी से चढ़ गया, जैसे कोई सिंह गर्जना करता हुआ पर्वत शिखर पर चढ़ता है।
 
But the Pandya king, Malayadhwaj, an expert in elephant-fighting, climbed up that great elephant, which was as high as a mountain peak, as swiftly as a roaring lion climbs the peak of a mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)