श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 20: अश्वत्थामाके द्वारा पाण्ड्यनेरशका वध  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  8.20.28 
प्रयुक्तांस्तान् प्रयत्नेन छित्त्वा द्रौणेरिषूनरि:।
चक्ररक्षौ रणे तस्य प्राणुदन्निशितै: शरै:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अश्वत्थामा के चलाये हुए बाणों को बड़े प्रयत्न से काटकर उसके शत्रु पाण्ड्य नरेश ने युद्धस्थल में अपने तीखे बाणों से उसके दोनों चक्ररक्षकों को मार डाला।
 
Having thus cut the arrows shot by Ashvatthama with great effort, his enemy Pandya Naresh killed both his chakra-protectors on the battlefield with his sharp arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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