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श्लोक 8.20.24  |
अथ द्रोणसुतस्येषूंस्ताञ्छित्त्वा निशितै: शरै:।
धनुर्ज्यां विततां पाण्डॺश्चिच्छेदादित्य तेजस:॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् पाण्ड्य राजा ने अपने तीखे बाणों से सूर्य के समान तेजस्वी अश्वत्थामा के बाणों को छिन्न-भिन्न कर दिया तथा उसके धनुष की तनी हुई डोरी को भी काट डाला। |
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| Thereafter the Pandya king with his sharp arrows shattered the arrows of Ashwatthama, who was as radiant as the Sun, and also cut the stretched string of his bow. |
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