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रामनारदकण्वाद्यैर्हितमुक्तं सभातले।
न गृहीतमनुस्मृत्य कच्चिन्न कुरुषे व्यथाम्॥ ७॥
अनुवाद
‘तुमने परशुराम, नारद और महर्षि कण्व द्वारा सभा में दी गई हितकारी सलाह को नहीं सुना। अब उन्हें स्मरण करके क्या तुम्हारे हृदय में पीड़ा नहीं हो रही है?॥ 7॥
‘You did not listen to the beneficial advice given by Parasurama, Narada and Maharishi Kanva in the assembly. Now, are you not feeling pain in your heart after remembering them?॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥