Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 8.2.20: मैं सोचता हूँ कि द्रोणाचार्य के मारे जाने के बाद मेरे सभी सैनिक भागकर शोक सागर में डूब गए होंगे। उनकी स्थिति वैसी ही भयावह हो गई होगी जैसी समुद्र में नाव डूबने पर हाथों से तैरते हुए लोगों की होती है।   |   mahabharat अध्याय 8.2: धृतराष्ट्र और संजयका संवाद   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 2: धृतराष्ट्र और संजयका संवाद  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  8.2.20 
विप्रद्रुतानहं मन्ये निमग्नान् शोकसागरे।
प्लवमानान् हते द्रोणे सन्ननौकानिवार्णवे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मैं सोचता हूँ कि द्रोणाचार्य के मारे जाने के बाद मेरे सभी सैनिक भागकर शोक सागर में डूब गए होंगे। उनकी स्थिति वैसी ही भयावह हो गई होगी जैसी समुद्र में नाव डूबने पर हाथों से तैरते हुए लोगों की होती है।
 
I think that after Dronacharya was killed, all my soldiers must have fled and drowned in the ocean of grief. Their plight must have become as dangerous as that of men swimming with their hands when their boat sinks in the ocean.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)