Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.2.13-15: जिन महात्मा को भृगुनंदन परशुरामजी ने उत्तम अस्त्र प्रदान किए थे, जिन्हें स्वयं परशुरामजी ने बाल्यकाल में धनुर्वेद की शिक्षा देने के लिए अपना शिष्य बनाया था, जिनकी कृपा से कुन्तीपुत्र राजकुमार पाण्डव महारथी हुए थे और अन्य राजाओं ने भी महारथी कहलाने की योग्यता प्राप्त की थी, उन्हीं सत्यप्रतिज्ञाधारी महाधनुर्धर द्रोणाचार्य का युद्धभूमि में धृष्टद्युम्न के हाथों मारा जाना सुनकर मेरे हृदय में बड़ी पीड़ा हो रही है ॥13-15॥ | mahabharat अध्याय 8.2: धृतराष्ट्र और संजयका संवाद । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिन महात्मा को भृगुनंदन परशुरामजी ने उत्तम अस्त्र प्रदान किए थे, जिन्हें स्वयं परशुरामजी ने बाल्यकाल में धनुर्वेद की शिक्षा देने के लिए अपना शिष्य बनाया था, जिनकी कृपा से कुन्तीपुत्र राजकुमार पाण्डव महारथी हुए थे और अन्य राजाओं ने भी महारथी कहलाने की योग्यता प्राप्त की थी, उन्हीं सत्यप्रतिज्ञाधारी महाधनुर्धर द्रोणाचार्य का युद्धभूमि में धृष्टद्युम्न के हाथों मारा जाना सुनकर मेरे हृदय में बड़ी पीड़ा हो रही है ॥13-15॥
The Mahatma to whom Bhrigunandan Parshuram had provided the best weapon, to whom Parshuram himself had made him his disciple to teach Dhanurveda in his childhood, by whose grace Kunti's son Prince Pandava became a Maharathi and other kings had also attained the qualification of being called Maharathi, on hearing that the same truth-promised great archer Dronacharya was killed in the battlefield by the hands of Dhrishtadyumna, I I am feeling great pain in my heart. 13-15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥