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mahabharat 8.19.58: जिस प्रकार इन्द्र राक्षसों का संहार करते हैं, उसी प्रकार पाण्ड्य राजा ने अपने बाणों से शत्रु योद्धाओं के चलाए हुए नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों को नष्ट करके उनका वध कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  8.19.58 
शत्रुप्रवीरैरस्त्राणि नानाशस्त्राणि सायकै:।
छित्त्वा तानवधीच्छत्रून् पाण्ड्य: शक्र इवासुरान्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार इन्द्र राक्षसों का संहार करते हैं, उसी प्रकार पाण्ड्य राजा ने अपने बाणों से शत्रु योद्धाओं के चलाए हुए नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों को नष्ट करके उनका वध कर दिया।
 
Just as Indra kills the demons, similarly the Pandya king destroyed the various types of weapons fired by the enemy warriors with his arrows and killed them.
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि संकुलयुद्धे एकोनविंशोऽध्याय:॥ १९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें संकुलयुद्धविषयक उन्नीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)