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mahabharat 8.19.56-57h: जैसे यमराज आयुहीन प्राणियों के प्राण हर लेते हैं, उसी प्रकार धनुर्धरों में श्रेष्ठ पाण्ड्य नाना प्रकार के बाणों द्वारा रणभूमि में शत्रु समूहों का नाश कर रहे थे। 56 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 8.19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  8.19.56-57h 
स हि नानाविधैर्बाणैरिष्वस्त्रप्रवरो युधि॥ ५६॥
न्यहनद् द्विषतां पूगान् गतासूनन्तको यथा।
 
 
अनुवाद
जैसे यमराज आयुहीन प्राणियों के प्राण हर लेते हैं, उसी प्रकार धनुर्धरों में श्रेष्ठ पाण्ड्य नाना प्रकार के बाणों द्वारा रणभूमि में शत्रु समूहों का नाश कर रहे थे। 56 1/2॥
 
Just as Yamraj takes away the lives of ageless creatures, similarly Pandya, the best among archers, was destroying the enemy groups in the battlefield with various types of arrows. 56 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)