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mahabharat 8.19.55-56h: तब श्रीकृष्ण ने वायु के समान वेग से अपने घोड़ों के साथ सेना में प्रवेश किया और देखा कि पाण्ड्य नरेश ने सेना को महान कष्ट पहुँचाया है; यह देखकर उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ।   |   mahabharat अध्याय 8.19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  8.19.55-56h 
प्रविश्य तद् बलं कृष्णस्तुरगैर्वातवेगितै:॥ ५५॥
पाण्ड्येनाभ्यर्दितं सैन्यं त्वदीयं वीक्ष्य विस्मित:।
 
 
अनुवाद
तब श्रीकृष्ण ने वायु के समान वेग से अपने घोड़ों के साथ सेना में प्रवेश किया और देखा कि पाण्ड्य नरेश ने सेना को महान कष्ट पहुँचाया है; यह देखकर उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ।
 
Then Shri Krishna entered the army with his horses as fast as the wind and saw that Pandya Naresh had inflicted great suffering on the army; he was very surprised to see this. 55 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)