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mahabharat 8.19.53-55h: इस प्रकार, किरीटधारी अर्जुन को युद्धभूमि दिखाते समय, श्रीकृष्ण ने दुर्योधन की सेना में महान कोलाहल सुना। वहाँ शंख और नगाड़ों की ध्वनि गूँज रही थी। भेरी और पणव आदि बाजे बज रहे थे। रथ के घोड़ों और हाथियों की हिनहिनाहट और तुरही तथा अस्त्र-शस्त्रों के आपस में टकराने की भयानक ध्वनि भी सुनाई दे रही थी। 53-54 1/2   |   mahabharat अध्याय 8.19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ  »  श्लोक 53-55h
 
 
श्लोक  8.19.53-55h 
एवं तां दर्शयन् कृष्णो युद्धभूमिं किरीटिने॥ ५३॥
गच्छन्नेवाशृणोच्छब्दं दुर्योधनबले महत्।
शङ्खदुन्दुभिनिर्घोषं भेरीपणवनि:स्वनम्॥ ५४॥
रथाश्वगजनादांश्च शस्त्रशब्दांश्च दारुणान्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार, किरीटधारी अर्जुन को युद्धभूमि दिखाते समय, श्रीकृष्ण ने दुर्योधन की सेना में महान कोलाहल सुना। वहाँ शंख और नगाड़ों की ध्वनि गूँज रही थी। भेरी और पणव आदि बाजे बज रहे थे। रथ के घोड़ों और हाथियों की हिनहिनाहट और तुरही तथा अस्त्र-शस्त्रों के आपस में टकराने की भयानक ध्वनि भी सुनाई दे रही थी। 53-54 1/2
 
Thus, while showing the battlefield to Arjuna, who wore a crown, Shri Krishna heard a great uproar in Duryodhan's army. The sound of conches and drums was reverberating there. The instruments like bheri and panava were being played. The neighing and trumpeting of chariot horses and elephants and the terrifying sounds of weapons clashing with each other could also be heard. 53-54 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)