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mahabharat 8.19.51-52h: इस युद्धभूमि की शोभा तो देखो, जो आकाश के समान है, जो तारों से सुशोभित है और जहाँ निर्मल चन्द्रमा का प्रकाश बिखरा हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह शरद ऋतु के तारों की मालाओं से सुशोभित है।   |   mahabharat अध्याय 8.19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  8.19.51-52h 
तारागणविचित्रस्य निर्मलेन्दुद्युतित्विष:॥ ५१॥
पश्येमां नभसस्तुल्यां शरन्नक्षत्रमालिनीम्।
 
 
अनुवाद
इस युद्धभूमि की शोभा तो देखो, जो आकाश के समान है, जो तारों से सुशोभित है और जहाँ निर्मल चन्द्रमा का प्रकाश बिखरा हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह शरद ऋतु के तारों की मालाओं से सुशोभित है।
 
Look at the beauty of this battlefield, which is like the sky, which is adorned with the stars and where the light of the pure moon is scattered. It seems that it is decorated with garlands of the stars of autumn. 51 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)