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mahabharat 8.19.46: देखो! वैदूर्य मणि से बनी छड़ियाँ और अंकुश भूमि पर पड़े हैं। घोड़ों की काठी और रत्नजटित कवच इधर-उधर बिखरे पड़े हैं।'   |   mahabharat अध्याय 8.19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  8.19.46 
वैदूर्यमणिदण्डांश्च पतितांश्चाङ्कुशान् भुवि।
अश्वानां च युगापीडान् रत्नचित्रानुरश्छदान्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
देखो! वैदूर्य मणि से बनी छड़ियाँ और अंकुश भूमि पर पड़े हैं। घोड़ों की काठी और रत्नजटित कवच इधर-उधर बिखरे पड़े हैं।'
 
‘Look! The rods and goads made of vaidurya gem are lying on the ground. The horses' saddles and gem-studded armour are lying scattered here and there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)