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mahabharat 8.19.44: कहीं विचित्र वैजयन्ती पताकाएँ पड़ी हैं, कहीं हाथी सवार मृत पड़े हैं और कहीं अनेक कम्बलों से ढके हुए हाथी झूले बिखरे पड़े हैं। उन्हें देखो। 44।   |   mahabharat अध्याय 8.19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  8.19.44 
वैजयन्तीर्विचित्राश्च हतांश्च गजयोधिन:।
वारणानां परिस्तोमान् संयुक्तानेककम्बलान्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
कहीं विचित्र वैजयन्ती पताकाएँ पड़ी हैं, कहीं हाथी सवार मृत पड़े हैं और कहीं अनेक कम्बलों से ढके हुए हाथी झूले बिखरे पड़े हैं। उन्हें देखो। 44।
 
‘Somewhere there are strange Vaijayanti flags lying, somewhere elephant riders have fallen dead and somewhere elephant swings covered with many blankets are lying scattered. Look at them. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)