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mahabharat 8.19.22-23: अर्जुन उस सेनारूपी समुद्र को, जो हाथी, घोड़े, रथ और पैदल सेना से युक्त था तथा महान् अस्त्र-शस्त्रों के प्रवाह से भरा हुआ था, अपने अस्त्र-सेतु के सहारे पार करना चाहते थे। उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे कहा, 'अबोध पार्थ! तुम यह क्या कर रहे हो? इन संशप्तकों का वध करके शीघ्रता से कर्ण को मार डालो।'   |   mahabharat अध्याय 8.19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  8.19.22-23 
साश्वपत्तिद्विपरथं महाशस्त्रौघसम्प्लवम्।
सहसा संतितीर्षन्तं पार्थ शस्त्रास्त्रसेतुना॥ २२॥
अथाब्रवीद् वासुदेव: पार्थ किं क्रीडसेऽनघ।
संशप्तकान् प्रमथ्यैनांस्तत: कर्णवधे त्वर॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन उस सेनारूपी समुद्र को, जो हाथी, घोड़े, रथ और पैदल सेना से युक्त था तथा महान् अस्त्र-शस्त्रों के प्रवाह से भरा हुआ था, अपने अस्त्र-सेतु के सहारे पार करना चाहते थे। उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे कहा, 'अबोध पार्थ! तुम यह क्या कर रहे हो? इन संशप्तकों का वध करके शीघ्रता से कर्ण को मार डालो।'
 
Arjuna wanted to cross that sea of ​​troops, which consisted of elephants, horses, chariots and infantry and was filled with the flow of great weapons, with the help of his bridge of weapons. At that time Lord Krishna said to him, 'Innocent Partha! What are you doing? After killing these Sanshpatas, try to kill Karna quickly.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)