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श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 19: अर्जुनके द्वारा संशप्तक-सेनाका संहार, श्रीकृष्णका अर्जुनको युद्धस्थलका दृश्य दिखाते हुए उनके पराक्रमकी प्रशंसा करना तथा पाण्ड्यनरेशका कौरव-सेनाके साथ युद्धारम्भ  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  8.19.12 
ते रथास्तत्र विध्वस्ता: परार्घ्या भान्त्यनेकश:।
धनिनामिव वेश्मानि हतान्यग्न्यनिलाम्बुभि:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वे बहुमूल्य और असंख्य रथ, जो वहाँ टूटे और गिरे हुए पड़े थे, अग्नि, वायु और जल से नष्ट हुए धनवानों के घरों के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
Those precious and numerous chariots, which lay broken and fallen there, looked like the houses of rich people destroyed by fire, wind and water. 12.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)