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mahabharat 8.18.22: हाथियों, रथों, घोड़ों और पैदल सैनिकों के झुंड चारों ओर से युद्धभूमि पर टूट पड़े, एक-दूसरे पर आक्रमण और प्रति-आक्रमण करने लगे। वे एक-दूसरे के प्रहारों से इतनी बुरी तरह घायल हो गए कि लड़खड़ाते हुए मर गए।   |   mahabharat अध्याय 8.18: अर्जुनके द्वारा हाथियोंसहित दण्डधार और दण्ड आदिका वध तथा उनकी सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 18: अर्जुनके द्वारा हाथियोंसहित दण्डधार और दण्ड आदिका वध तथा उनकी सेनाका पलायन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  8.18.22 
गजा रथाश्वा: पुरुषाश्च संघश:
परस्परघ्ना: परिपेतुराहवे।
परस्परं प्रस्खलिता: समाहिता
भृशं निपेतुर्बहुभाषिणो हता:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हाथियों, रथों, घोड़ों और पैदल सैनिकों के झुंड चारों ओर से युद्धभूमि पर टूट पड़े, एक-दूसरे पर आक्रमण और प्रति-आक्रमण करने लगे। वे एक-दूसरे के प्रहारों से इतनी बुरी तरह घायल हो गए कि लड़खड़ाते हुए मर गए।
 
Herds of elephants, chariots, horses and foot soldiers attacked the battlefield from all sides, attacking and counterattacking each other. They were so badly injured by each other's blows that they stumbled and died while quarrelling.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)