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mahabharat 8.18.19: तत्पश्चात् किरीटधारी अर्जुन द्वारा फेंके गए अर्धचन्द्र से कटकर वह लट्ठा हाथी से पृथ्वी पर गिर पड़ा। उस समय वह रक्त से भीगा हुआ सिर, पश्चिम की ओर अस्त होते हुए सूर्य के समान शोभायमान हो गया। 19॥   |   mahabharat अध्याय 8.18: अर्जुनके द्वारा हाथियोंसहित दण्डधार और दण्ड आदिका वध तथा उनकी सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 18: अर्जुनके द्वारा हाथियोंसहित दण्डधार और दण्ड आदिका वध तथा उनकी सेनाका पलायन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.18.19 
तथार्धचन्द्रेण हतं किरीटिना
पपात दण्डस्य शिर: क्षितिं द्विपात्।
तच्छोणितार्द्रं निपतद् विरेजे
दिवाकरोऽस्तादिव पश्चिमां दिशम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् किरीटधारी अर्जुन द्वारा फेंके गए अर्धचन्द्र से कटकर वह लट्ठा हाथी से पृथ्वी पर गिर पड़ा। उस समय वह रक्त से भीगा हुआ सिर, पश्चिम की ओर अस्त होते हुए सूर्य के समान शोभायमान हो गया। 19॥
 
Thereafter, the head of the stick fell on the earth from the elephant after being cut by the half-moon thrown by the crowned Arjuna. At that time, that head, falling drenched in blood, became as beautiful as the sun setting from sunset to the west. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)