श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 17: अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.17.7 
द्रौणेरिषूनर्जुन: संनिवार्य
व्यायच्छतस्तद्‍‍द्विगुणै: सुपुङ्खै:।
तं साश्वसूतध्वजमेकवीर-
मावृत्य संशप्तकसैन्यमार्च्छत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने बड़े प्रयत्न से द्रोणपुत्र के बाणों को दुगुने सुन्दर पंख वाले बाणों द्वारा रोक दिया और उस वीर योद्धा को उसके घोड़े, सारथि और ध्वज सहित ढक दिया। फिर वे संशप्तकों की सेना की ओर बढ़े।
 
Arjuna, with great effort, warded off the arrows of Drona's son with twice as many arrows having beautiful wings and covered that brave warrior along with his horse, charioteer and flag. Then he proceeded towards the army of Sansaptakas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)