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mahabharat 8.17.4: इसके बाद अश्वत्थामा ने भी अपने सैकड़ों बाणों से श्रीकृष्ण और अर्जुन को अत्यन्त घायल कर दिया। उस समय वे दोनों अपनी किरणों को फैलाते हुए प्रलयकाल के दो सूर्यों के समान प्रकट हुए॥4॥   |   mahabharat अध्याय 8.17: अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 17: अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.17.4 
अथ कृष्णौ शरशतैरश्वत्थाम्नार्दितौ भृशम्।
स्वरश्मिजालविकचौ युगान्तार्काविवासतु:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद अश्वत्थामा ने भी अपने सैकड़ों बाणों से श्रीकृष्ण और अर्जुन को अत्यन्त घायल कर दिया। उस समय वे दोनों अपनी किरणों को फैलाते हुए प्रलयकाल के दो सूर्यों के समान प्रकट हुए॥4॥
 
After this Ashwatthama also deeply wounded Shri Krishna and Arjun with hundreds of his arrows. At that time both of them appeared like two suns at the time of doomsday spreading their rays. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)