जैसे मन्त्र, औषधि, उपचार और योग के द्वारा शरीर से रोग दूर हो जाता है, वैसे ही जब शत्रु अश्वत्थामा चारों घोड़ों द्वारा युद्धभूमि से भगा दिया गया, तब श्रीकृष्ण और अर्जुन पुनः वायु में लहराती हुई और जल के प्रवाह के समान गम्भीर शब्द करने वाली ध्वजाओं से सुशोभित रथ पर सवार होकर संशप्तकों की ओर चले॥25-26॥
Just as a disease is removed from the body with the help of mantra, medicine, treatment and yoga, similarly when the enemy Ashwatthama was driven away from the battlefield by the four horses, then Shri Krishna and Arjuna again proceeded towards the Samshaptakas in a chariot decorated with flags fluttering in the wind and making a deep noise like the flow of water. ॥25-26॥
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि अश्वत्थामपराजये सप्तदशोऽध्याय:॥ १७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें अश्वत्थामाकी पराजयविषयक सत्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥