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mahabharat 8.17.20: तब दशार्हवंशी भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा, 'पार्थ! तुम प्रमाद क्यों कर रहे हो? इस योद्धा का वध कर दो। यदि इसकी उपेक्षा की गई, तो यह और अधिक अपराध करेगा और बिना उपचार वाले रोग के समान अधिक कष्टदायक हो जाएगा।'   |   mahabharat अध्याय 8.17: अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 17: अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  8.17.20 
अथार्जुनं प्राह दशार्हनाथ:
प्रमाद्यसे किं जहि योधमेतम्।
कुर्याद्धि दोषं समुपेक्षितोऽयं
कष्टो भवेद् व्याधिरिवाक्रियावान्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब दशार्हवंशी भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा, 'पार्थ! तुम प्रमाद क्यों कर रहे हो? इस योद्धा का वध कर दो। यदि इसकी उपेक्षा की गई, तो यह और अधिक अपराध करेगा और बिना उपचार वाले रोग के समान अधिक कष्टदायक हो जाएगा।'
 
Then Lord Krishna of the Dasarha clan said to Arjuna, 'Parth! Why are you being negligent? Kill this warrior. If he is ignored, he will commit more crimes and will become more painful like a disease which is not treated.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)