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mahabharat 8.17.16: अर्जुन ने अपने बाणों से पीड़ित होकर आगे बढ़कर शत्रुओं के बाणों से उत्पन्न अंधकार को अचानक अपने अस्त्रों से नष्ट कर दिया तथा अपने उत्तम पंखयुक्त बाणों से अश्वत्थामा तथा आपके अन्य समस्त सैनिकों को पुनः घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 8.17: अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 17: अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.17.16 
तमर्जुनस्तांश्च पुनस्त्वदीया-
नभ्यर्दितस्तैरभिसृत्य शस्त्रै:।
बाणान्धकारं सहसैव कृत्त्वा
विव्याध सर्वानिषुभि: सुपुङ्खै:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने अपने बाणों से पीड़ित होकर आगे बढ़कर शत्रुओं के बाणों से उत्पन्न अंधकार को अचानक अपने अस्त्रों से नष्ट कर दिया तथा अपने उत्तम पंखयुक्त बाणों से अश्वत्थामा तथा आपके अन्य समस्त सैनिकों को पुनः घायल कर दिया।
 
Arjuna, afflicted by his arrows, advanced forward and suddenly destroyed the darkness caused by the enemy's arrows with his weapons and again wounded Ashvatthama and all your other soldiers with his excellent feathered arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)