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mahabharat 8.17.1: संजय कहते हैं- राजन! तत्पश्चात जैसे आकाश में नक्षत्रों के निकट शुक्राचार्य और बृहस्पति आपस में लड़ते हैं, वैसे ही युद्धस्थल में श्रीकृष्ण के निकट शुक्र और बृहस्पति के समान तेजस्वी अश्वत्थामा और अर्जुन में युद्ध होने लगा॥1॥   |   mahabharat अध्याय 8.17: अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 17: अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाकी पराजय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.17.1 
संजय उवाच
तत: समभवद् युद्धं शुक्राङ्गिरसवर्चसो:।
नक्षत्रमभितो व्योम्नि शुक्राङ्गिरसयोरिव॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! तत्पश्चात जैसे आकाश में नक्षत्रों के निकट शुक्राचार्य और बृहस्पति आपस में लड़ते हैं, वैसे ही युद्धस्थल में श्रीकृष्ण के निकट शुक्र और बृहस्पति के समान तेजस्वी अश्वत्थामा और अर्जुन में युद्ध होने लगा॥1॥
 
Sanjay says- Rajan! Thereafter, like Shukracharya and Jupiter fighting with each other near the constellation in the sky, there started a fight between Ashwatthama and Arjuna, who were as bright as Venus and Jupiter, near Shri Krishna in the battlefield. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)