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mahabharat 8.16.51: तब पाण्डुपुत्र अर्जुन संशप्तकों को छोड़कर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा के सामने आये, जैसे कोई दान देने वाला पंक्ति में बैठने के अयोग्य ब्राह्मणों को छोड़कर याचना करने वाले ब्राह्मण के पास जाता है ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 8.16: अर्जुनका संशप्तकों तथा अश्वत्थामाके साथ अद्भुत युद्ध   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 16: अर्जुनका संशप्तकों तथा अश्वत्थामाके साथ अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  8.16.51 
अथ संशप्तकांस्त्यक्त्वा पाण्डवो द्रौणिमभ्ययात्।
अपाङ्‍‍क्तेयानिव त्यक्त्वा दाता पाङ्‍‍क्तेयमर्थिनम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तब पाण्डुपुत्र अर्जुन संशप्तकों को छोड़कर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा के सामने आये, जैसे कोई दान देने वाला पंक्ति में बैठने के अयोग्य ब्राह्मणों को छोड़कर याचना करने वाले ब्राह्मण के पास जाता है ॥ 51॥
 
Then Arjuna, son of Pandu, leaving behind the Samshaptakas, came before Ashwatthama, son of Drona, just as a donor leaves behind the Brahmins who are unworthy of sitting in the line and goes towards the Brahmin who is pleading. ॥ 51॥
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि अश्वत्थामार्जुनसंवादे षोडशोऽध्याय:॥ १६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें अश्वत्थामा और अर्जुनका संवादविषयक सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १५ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६६ १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)