श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 16: अर्जुनका संशप्तकों तथा अश्वत्थामाके साथ अद्भुत युद्ध  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  8.16.47 
धनंजययुगान्ताक: संशप्तकमहार्णवम्।
व्यशोषयत दु:शोषं तीक्ष्णै: शरगभस्तिभि:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
अर्जुनरूपी प्रलयकालीन सूर्य ने अपने शक्तिशाली बाणों से संशप्तकों की सेना रूपी समुद्र को, जिसका दोहन करना कठिन था, लीन कर दिया।
 
The doomsday sun in the form of Arjuna absorbed the ocean of the army of the Samshaptakas, which was difficult to exploit, with his powerful arrow-rays.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)