श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  8.15.9 
तत: शरशतैर्द्रौणिरर्दयामास पाण्डवम्।
न चैनं कम्पयामास मातरिश्वेव पर्वतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तब अश्वत्थामा ने सैकड़ों बाणों से पाण्डुपुत्र भीमसेन को पीड़ित किया; किन्तु जिस प्रकार वायु पर्वतों को हिला नहीं सकती, उसी प्रकार वह उन्हें हिला न सका।
 
Ashvatthama then afflicted Pandu's son Bhimasena with hundreds of arrows; but just as the wind cannot shake the mountains, so he could not make them tremble.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)