तत: शरशतैर्द्रौणिरर्दयामास पाण्डवम्।
न चैनं कम्पयामास मातरिश्वेव पर्वतम्॥ ९॥
अनुवाद
तब अश्वत्थामा ने सैकड़ों बाणों से पाण्डुपुत्र भीमसेन को पीड़ित किया; किन्तु जिस प्रकार वायु पर्वतों को हिला नहीं सकती, उसी प्रकार वह उन्हें हिला न सका।
Ashvatthama then afflicted Pandu's son Bhimasena with hundreds of arrows; but just as the wind cannot shake the mountains, so he could not make them tremble.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥