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mahabharat 8.15.7: तत्पश्चात् पराक्रमी भीमसेन ने हँसते हुए युद्धस्थल में विजय के लिए प्रयत्नशील अश्वत्थामा के मस्तक पर तीन भालों से प्रहार किया॥7॥   |   mahabharat अध्याय 8.15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.15.7 
ततो द्रौणिं रणे भीमो यतमानं पराक्रमी।
त्रिभिर्विव्याध नाराचैर्ललाटे विस्मयन्निव॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी भीमसेन ने हँसते हुए युद्धस्थल में विजय के लिए प्रयत्नशील अश्वत्थामा के मस्तक पर तीन भालों से प्रहार किया॥7॥
 
Thereafter, the mighty Bhimasena, smilingly, struck the forehead of Ashwatthama, who was striving for victory in the battlefield, with three lances. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)