श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  8.15.6 
ललाटस्थं ततो बाणं धारयामास पाण्डव:।
यथा शृङ्गं वने दृप्त: खड्गो धारयते नृप॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जिस प्रकार शक्ति के मद में चूर गैंडा वन में सींग लगाकर रहता है, उसी प्रकार पाण्डुपुत्र भीम ने उस बाण को अपने मस्तक में लगा लिया।
 
O lord of men! Just as a rhinoceros intoxicated with power wears its horn in the forest, in the same way Pandu's son Bhima wore that arrow stuck in his forehead.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)