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mahabharat 8.15.44: महाराज ! इस प्रकार शत्रुता के ताप से बार-बार व्याकुल होने वाले पाण्डुपुत्र भीमसेन को भी उनके सारथि विशोक ने युद्धभूमि से दूर हटा लिया ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 8.15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  8.15.44 
तथैव पाण्डवं राजन् विह्वलन्तं मुहुर्मुहु:।
अपोवाह रथेनाजौ सारथि: शत्रुतापनम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
महाराज ! इस प्रकार शत्रुता के ताप से बार-बार व्याकुल होने वाले पाण्डुपुत्र भीमसेन को भी उनके सारथि विशोक ने युद्धभूमि से दूर हटा लिया ॥ 44॥
 
Maharaj! In this manner, Pandu's son Bhimasena, who was repeatedly agitated by the heat of enmity, was also taken away from the battlefield by his charioteer Vishoka. ॥ 44॥
 
इति श्रीमहाभारते कर्णपर्वणि अश्वत्थामभीमसेनयोर्युद्धे पञ्चदशोऽध्याय:॥ १५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत कर्णपर्वमें अश्वत्थामा और भीमसेनका युद्धविषयक पन्द्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)