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mahabharat 8.15.36: महाराज! वे दोनों वीर योद्धा, जिन्होंने एक-दूसरे के विरुद्ध अपराध किये थे, क्रोध से आँखें फाड़े एक-दूसरे को घूर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 8.15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  8.15.36 
तौ शूरौ समरे राजन् परस्परकृतागसौ।
परस्परमुदीक्षेतां क्रोधादुद्‍वृत्य चक्षुषी॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वे दोनों वीर योद्धा, जिन्होंने एक-दूसरे के विरुद्ध अपराध किये थे, क्रोध से आँखें फाड़े एक-दूसरे को घूर रहे थे।
 
King! Both those brave warriors who had committed crimes against each other were staring at each other in anger with their eyes wide open.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)