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mahabharat 8.15.34: युद्धस्थल में इन दोनों के अद्भुत और अकल्पनीय कर्मों को देखकर सिद्धों और चारणों के समूह आश्चर्यचकित हो गए ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 8.15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  8.15.34 
अद्भुतं चाप्यचिन्त्यं च दृष्ट्वा कर्म तयो रणे।
सिद्धचारणसंघानां विस्मय: समपद्यत॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में इन दोनों के अद्भुत और अकल्पनीय कर्मों को देखकर सिद्धों और चारणों के समूह आश्चर्यचकित हो गए ॥34॥
 
Seeing the wonderful and unimaginable deeds of these two on the battlefield, the groups of Siddhas and Charanas were astonished. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)