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mahabharat 8.15.31: अहा! इनके वीर्य का सार अद्भुत है। इन दोनों का युद्ध सौंदर्य अद्भुत है। ये दोनों समरांगण में कालान्तक और यम के समान शोभा पाते हैं। 31॥   |   mahabharat अध्याय 8.15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना   ।   mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  8.15.31 
अहो वीर्यस्य सारत्वमहो सौष्ठवमेतयो:।
स्थितावेतौ हि समरे कालान्तकयमोपमौ॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अहा! इनके वीर्य का सार अद्भुत है। इन दोनों का युद्ध सौंदर्य अद्भुत है। ये दोनों समरांगण में कालान्तक और यम के समान शोभा पाते हैं। 31॥
 
Oh! The essence of their semen is extraordinary. The battle beauty of these two is astonishing. Both of them look like Kaalantaka and Yama in Samarangan. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)