Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 8.15.14: वे दोनों श्रेष्ठ पुरुष रणभूमि में दो व्याघ्रों के समान विचरण कर रहे थे, धनुष उन व्याघ्रों के मुख थे और बाण उनके दाँत थे। वे दोनों भयंकर और भयानक प्रतीत हो रहे थे॥14॥ | mahabharat अध्याय 8.15: अश्वत्थामा और भीमसेनका अद्भुत युद्ध तथा दोनोंका मूर्च्छित हो जाना । mahabharat पर्व 8: कर्ण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्याघ्राविव च संग्रामे चेरतुस्तौ नरोत्तमौ।
शरदंष्ट्रौ दुराधर्षौ चापवक्त्रौ भयंकरौ॥ १४॥
अनुवाद
वे दोनों श्रेष्ठ पुरुष रणभूमि में दो व्याघ्रों के समान विचरण कर रहे थे, धनुष उन व्याघ्रों के मुख थे और बाण उनके दाँत थे। वे दोनों भयंकर और भयानक प्रतीत हो रहे थे॥14॥
Those two best of men were roaming in the battlefield like two tigers, the bows were the mouths of those tigers and the arrows were their teeth. Both of them appeared fierce and dreadful.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥