श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.14.7 
सोऽन्यत् कार्मुकमादाय वेगघ्नं रुक्मभूषितम्।
चित्ररूपधरं चक्रे चित्रसेनं शरोर्मिभि:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तब श्रुतकर्मा ने शत्रुओं के वेग को नष्ट करने में समर्थ सोने से विभूषित दूसरा धनुष लिया और अपने बाणों की तरंगों से चित्रसेन को विचित्र रूप धारण करा दिया।
 
Then Shrutakarma took another bow decorated with gold which was capable of destroying the speed of the enemies and with the waves of his arrows made Chitrasena assume a strange form.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)