श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  8.14.4 
सोऽतिविद्धो महाराज नाराचेन महात्मना।
मूर्च्छामभिययौ वीर: कश्मलं चाविवेश ह॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महामना श्रुतकर्मा के बाण से गंभीर रूप से घायल होकर वीर चित्रसेन मूर्छित हो गया। वह अचेत हो गया।
 
After being severely injured by the arrow of Mahamana Shrutakarma, the brave Chitrasena fell unconscious. He became unconscious.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)