श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  8.14.32 
स तस्य गात्रावरणं भित्त्वा हृदयमेव च।
जगाम धरणीं तूर्णं महोरग इवाशयम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तलवार उसके कवच और छाती को छेदती हुई तुरन्त पृथ्वी में धँस गई, मानो कोई विशाल सर्प उसके बिल में घुस गया हो ॥32॥
 
The sword pierced his armour and chest and immediately sank into the earth, as if a huge serpent had entered its hole. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)