श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  8.14.3 
श्रुतकर्मा तत: क्रुद्धश्चित्रसेनं चमूमुखे।
नाराचेन सुतीक्ष्णेन मर्मदेशे समार्पयत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तब क्रोध में भरे हुए श्रुतकर्मा ने चित्रसेन की सेना के मुहाने पर तीखे बाण से आक्रमण किया।
 
Then Shrutakarma, filled with anger, attacked Chitrasena with a sharp arrow at the mouth of the army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)