श्री महाभारत  »  पर्व 8: कर्ण पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीपुत्र श्रुतकर्मा और प्रतिविन्ध्यद्वारा क्रमश: चित्रसेन एवं चित्रका वध, कौरव-सेनाका पलायन तथा अश्वत्थामाका भीमसेनपर आक्रमण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  8.14.24 
तामापतन्तीं सहसा महोल्काप्रतिमां तदा।
द्विधा चिच्छेद समरे प्रतिविन्ध्यो हसन्निव॥ २४॥
 
 
अनुवाद
वह शक्ति, जो युद्धस्थल में अचानक विशाल उल्का के समान प्रकट हुई थी, प्रतिविन्ध्य ने हँसते हुए उसके दो टुकड़े कर दिए। 24।
 
That Shakti, which suddenly appeared in the battlefield like a huge meteor, was cut into two pieces by Prativindhya while laughing. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)